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PRATYASHA

'प्रत्याशा' ज़रुर रंग लाएगी:खेयाली दस्तीदार

कोलकाता l 1989 में चंद्रा दस्तीदार ने एक प्रत्याशा नामक एक नाटक लिखा था. आगे चलकर 1991 में इसे मंचन भी किया गया. आज फिर से उसी नाटक को एक बेहतरीन रुप से प्रस्तुत करने के लिए संस्था गेमप्लान खुद चलकर आगे आई है. चंद्रा दस्तीदार की लड़की खेयाली दस्तीदार ने इसी नाटक को एक नया रुप दिया है. जिसे आगामी 23 नवंबर 2019 को जीडी बिड़ला सभागार में प्रस्तुत किया जाएगा. 

उपरोक्त विषय को लेकर आज माहनगर में एक संवाददाता सम्मेलन का आयोजन किया गया था.

इस नाटक में सब्यसाची चक्रवर्ती, कौशिकी गुहा,रामादित्य रे, खेयाली दस्तीदार, राहुल देव बोस और अनुषा विश्वनाथन मुख्य भूमिका में होंगे. नाटक का निर्देशन खेयाली दस्तीदार करेंगी.
ये नाटक एक सिंगल मदर की कहानी बयां करेगी.

मौके पर उपस्थित खेयाली दस्तीदार ने कहा, इस नाटक के द्वारा मैं अपनी माँ श्रीमती चंद्रा दस्तीदार और पिता श्री जोछन दस्तीदार को श्रदांजलि देना चाहती हूं. और इसी वजह से मैने इस नाटक को चुना. 

उन्होंने आगे कहा, यह नाटक ज़रुर रंग लाएगी.

कार्यक्रम के दौरान अभनेता सब्यसाची ने कहा, जब पहली बार इस नाटक का मंचन किया गया था तो दर्शकों की ओर से मिली जुली प्रतिक्रिया मिली थी. मैने उस दौरान नाटक में एक अहम भूमिका निभाई थी.और तब मुझे लगा था कि इस नाटक में ड्रामेटिक एलीमेंट्स की कमी थी. पर आज खेयाली ने इसमें कुछ और संयोजन किये हैं, और शायद  वही चीज़े कारगर साबित होंगे.

वही मौके पर उपस्थित इस नाटक  की एक और नायिका अनुषा से जब उनके चरित्र के बारे में पूछा गया, तो उसके जवाब में उन्होंने कहा, इस नाटक में मेरे चरित्र का नाम मिठुआ है. जो अपने पिता के साथ रहतीं हैं और उनसे बेहद प्यार करतीं हैं. मिठुआ में काफी बचपना सवार है. वह जो जी में चाहे करती हैं और काफी हाज़िरजवाबी भी हैं. मिठुआ अमेरिका में पली बड़ी और फिर एकदिन कोलकाता आती हैं. आने के बाद उसे अपनी मां के बारे में जानकारी मिलती है. उसकी मां की कुछ एक चीज़ें उससे काफी मिलती-जुलती है. और फिर उसकी जिंदगी में एक नया मोड़ आ जाता है.

उन्होंने आगे कहा, इस चरित्र में काफी दर्द छुपा है, और मिठुआ कभी उस चीज़ को बयां नही करतीं हैं. आप यू कह सकते हैं कि मेरा चरित्र वाकई लार्जर देन लाइफ है.'

इस नाटक में काफी इंटेंसिटी है,' जी हां, मौके पर उपस्थित नाटक का एक और कलाकार राहुल ने नाटक के बारे में बातचीत करते हुए उपरोक्त बातें कही.

इस अवसर पर उपस्थित नाटक के निर्माता जीत बनर्जी ने कहा, इस नाटक के द्वारा हम ऑडियंस को यह बताने की कोशिश करेंगे  कि आज भी नाटक का दौर जारी रखा जा सकता है.

वही मौके पर ब्रतती ने कहा, मेरे लिए यही वो नाटक है जिसके लिए आजीवन प्रतीक्षा किया जा सकता है.

उन्होंने आगे कहा, इस नाटक के जेहन में आते ही मुझे समसुल रहमान की एक कविता ' एकटा वृक्खेर निकटे गिये बोली' याद आ जाती है.
आपको बता दे, आज कार्यक्रम के दौरान इस नाटक का पोस्टर भी जारी किया गया.
अब देखना यह है कि यह नाटक दर्शकों को कितनी पसंद आएगी और यह तो वक़्त ही बताएगा.

इस अवसर पर मालविका बनर्जी, कौशिकी गुहा,रामादित्य रे सहित कई गणमान्य लोग मौजूद थे.

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