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16 मार्च को मनाया जाएगा शीतला अष्टमी

-गोल्ड मेडलिस्ट डॉक्टर मंजू रानी सिंह द्वारा लिखित

कोलकाता. शीतला अष्टमी चैत्र मास के कृष्ण पक्ष के अष्टमी तिथि को मनाया जाता है. इस बार शीतला अष्टमी तिथि 16 मार्च सोमवार को है. माता गदर्भ पे अभय मुद्रा में विराजमान रहती हैं. उनके हाथों में कलश, नीम, सूप तथा झाड़ू रहता है. मां के हाथों में रखी इन चीजों का अलग अलग महत्व है. कलश में देवी देवतओं का वास होता है, नीम रोग के प्रतिरोध के रूप में है, झाड़ू का अर्थ है साफ सफाई जरूरी होता है, तथा सूप का अर्थ है गंदी चीजों का बहिष्कार करना और अच्छी चीजों को ग्रहण करना.

कई जगहों में शीतला अष्टमी को बसौरा या बसौड़ा भी कहा जाता है. इस पूजा में माता को बासी बना हुआ प्रसाद चढ़ाया जाता है अर्थात माता का प्रसाद एक दिन पहले ही यानी सप्तमी तिथि को ही बना लिया जाता है. क्योंकि माता को ठंडी चीजें पसंद है. माता की पूजा करने वाले व्यक्ति भी यानी व्रती भी बासी भोजन ग्रहण करते हैं.

मालूम हो कि शीतला माता को चेचक जैसी बीमारी की देवी भी माना जाता है.

लेखिका के बारे में-

बताते चले कि डॉ.मंजू रानी सिंह पश्चिम बंगाल की एक प्रसिद्ध एस्ट्रोलॉजर हैं. उनको वेदमाता अवार्ड से लेकर कई अवार्ड मिल चुके हैं.

अधिक जानकारी के लिए कृपया नीचे दिए गए पते को देख सकते हैं-

Facebook: Astrology Tips by Manju Rani Singh

@AstrologerDrManjuRaniSingh

YouTube: Astrologer Dr Manju Rani Singh

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