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अहसास: 31 कविताओं का संग्रह

किताब: अहसास
लेखक: प्रियंका तिवारी
प्रकाशक: एन एम पब्लिसिटी
पृष्ठ:31 

-कहते हैं भगवान की सबसे बड़ी नैमत होती है मोहब्बत. अगर ये किसी को मिल जाती है तो उसे खुदा की खुदाई मिल जाती है. हर धर्म हर मज़हब में इसे खुदा का दर्ज़ा दिया गया है. यानी मोहब्बत हासिल होते ही आपको ये अहसास होने लगता है कि असल में मोहब्बत चीज़ होती क्या है. संबंधों के बगैर ये समझना बेहद मुश्किल है. रिश्तों के बीच प्यार के अहसासों का पता तब चल पाता है जब आप उसमें से गुज़र रहे होते हैं. हाल ही में लेखिका प्रियंका तिवारी की प्रकाशित 31 कविताओं के संकलन पर आधारित किताब 'अहसास' रिश्तों की गहराईयों का अहसास दिलाती है व दर्शाती है. दूसरी तरफ ये अपनों के बीच संबंधों के बीच पनपते अहसासों को बयां करती है. उनकी लिखी हुई कविताओं में पहचान , जिंदगानी, मैं, सदियां, तन्हाई, दुनिया, रोशनी, तकदीर, मोड़, इंतज़ार, मां इत्यादि बेशक तारीफे काबिल है.

कुछ समय पहले उपरोक्त किताब को बॉलीवुड अभिनेता संजय मिश्रा के हाथों विमोचन किया गया था. दूसरी बार अहसास का विमोचन लखनऊ में राज्यपाल के एडीसी माननीय श्री प्रवीण भोरिना के हाथों हुआ. इसके अलावा किताब को पूर्व गवर्नर माननीय श्री राम नायक, पूर्व मंत्री श्रीमती रीता बहुगुणा जोशी एवं उत्तरप्रदेश सरकार के मंत्री श्रीमती स्वाति सिंह को भी दिया गया. सभी ने शुभकामनाओं के साथ अपना आशीर्वाद भी दिया.

किताब में से अगर मां कविता को लिया जाए तो लेखिका ने मां की सरलता को अपने लेख के ज़रिए बखूबी दर्शाया है. वहीं किताब की आखिरी कविता अहसास में कवियित्री ये एहसास जताती है कि ज़िन्दगी में कभी ऐसा भी मोड़ आता है जब कोई किसी की वजह से जीना सीख लेता है, और तब वे एक दूसरे के प्रति ये अहसास जताते हैं.

कविता में चिंतन और विचारों को सहज और सरल तरीक़े से पेश किया गया है जिससे कविता का अर्थ पाठक को सहजता से समझ आ जाता है। पुस्तक का आवरण भी आकर्षक है। काव्य प्रेमियों के लिए यह एक अच्छा कविता संग्रह है। यूं देखा जाए तो कवियित्री अपने ख्यालातों तथा जज्बातों को बखूबी पेश किया है.

आपको बता दें, कवियित्री प्रियंका तिवारी मूल रूप से उत्तर प्रदेश के देवरिया ग्राम नोनापार की निवासी हैं. उन्होंने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा केंद्रीय विद्यालय बैरकपुर वायुसेना से ली हैैं. वर्तमान में वे टीटागढ़ थाना अन्तर्गत बैरकपुर के कॉलेज पल्ली की निवासी हैं. उनके द्वारा लिखी कविता मां राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए भी नामित हो चुकी है.

फिलहाल वे एलिट इंस्टीच्यूट ऑफ इंजीनियरिंग ऐंड मैनेजमेंट, सोदपुर में बतौर असिस्टेन्ट प्रोफेसर(अंग्रेज़ी) की हैसियत से कार्यरत हैं.

तिवारी से एक साक्षात्कार के दौरान ये पूछे जाने पर कि आपको कविताएं लिखने की प्रेरणा कहां से मिली, के जवाब में उन्होंने कहा, मुझे इसकी प्रेरणा अपने गांव के कुल देवता मणिनाथ बाबा से मिली है।

 

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