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एम विश्वास ऐंड सिम्फनी

रवींद्रनाथ टैगोर से है इनका अद्भुत प्रेम

-सप्तर्षि विश्वास,कोलकाता

म विश्वास ऐंड सिम्फनी और रागा म्यूजिक कम्युनिकेशन्स प्राइवेट लिमिटेड के कर्णधार श्री प्रेम कुमार गुप्ता का जन्म उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद जिले में हुआ था। उनके जन्म के ठीक 3 महीने बाद उनका पूरा परिवार महानगर आ गया था। महज़ 14 साल की उम्र में ही वे संगीत जगत से जुड़ने लगे थे. ये बात उन दिनों की है जब उनके पिता की न्यू मार्केट में रिकार्ड्स की दुकान (सिम्फनी) हुआ करती थी, वर्ष 1964-65 ही रहा होगा उन्होंने सिम्फनी से अपना नाता जोड़ लिया. और तब उनकी पहचान रिकार्ड्स और म्यूजिक से होने लगी थी. कस्टमर्स की मुरादें पूरी करते-करते कब वे संगीत की दुनिया में प्रवेश कर गए थे ये उनको पता न चला. तब एक दिन अचानक सिंगर नंदिनी भट्टाचार्या की ओर से कुछ रवींद्रसंगीत के हिंदी अनुवाद का काम आया. उन्होंने किसी जानकार से पहले तो ये काम करवाया . लेकिन नंदिनी को यह काम पसंद नहीं आया. तब प्रेम ने खुद 3-4 गाने अनुवाद किये और उन्हें दिखाया. उधर नंदिनी को पसंद आते ही प्रेम ने सोचा कि उनमें वाकई अच्छे अनुवादक मौजूद है.  चूंकि उनको रविंद्र संगीत बेहद पसंद था इसलिए जो गाने उनको पसंद आते थे वे उनका अनुवाद करने लगे. धुन तो थे ही नोटेशन्स वगैरह श्री मलय घोष तैयार कर के देते थे। बता दें आपको कि जनाब यानी मलय जी ऑल इंडिया रेडियो के शास्त्रीय संगीत विभाग के एग्जामिनर हैं। इतना ही नहीं संगीतकार कल्याण सेन बराट,चन्दन रॉय चौधरी, अलोक रॉय चौधरी, मुंबई के प्रसिद्ध म्यूजिक डायरेक्टर जॉली इत्यादि जो भी उनके पास आते हैं वे उन से ही अपनी अनुवाद के इस कला से रूबरू ज़रूर करवाते हैं. ये सिलसिला आज से 10 साल पहले शुरू हुआ था और नतीजा सुनकर आप दंग रह जाएंगे. 800 से भी ज़्यादा रविंद्र संगीत का हिंदी अनुवाद वे कर चुके हैं, 270 से 280 नज़रुल गीति का हिंदी अनुवाद और तो और रवींद्रनाथ की पूरी जीवनी उन्होंने लिख डाली है.

इसके अलावा उन्होंने श्यामा संगीत, शास्त्रीय संगीत का भी अनुवाद किया है. श्रीकुमार चटर्जी और तपन सिन्हा उनके अनुवाद पर काम कर चुके हैं. श्यामा, शापमोचन, बाल्मिकी प्रतिभा और मायार खेला भी उन्होंने ही अनुवाद किया है. उनके अनुवाद पर 14 म्यूजिक सीडी (रविंद्र संगीत की) भी ज़ारी हो चुकी है.
 
मालूम हो कि गुप्ता ने 1983 में धर्मतल्ला मेट्रो स्टेशन के निकट सिम्फनी रिकॉर्डिंग्स इंडिया नामक एक रिकॉर्डिंग स्टूडियो की शुरुआत की थी. तब उन्होंने पहली बार मुस्लिम डिवोशनल कैसेट्स (नाथ और कव्वालियां) बनाई थी. जिसमें उस वक़्त के मशहूर फनकार जैसे जफर जलाल पूरी, हैदर लाड़ी , अबिदुल्लाह खान, युसूफ आज़ाद कव्वाल इत्यादि शामिल थे. और आगे चलकर 1993 में यही से रागा म्यूजिक कंपनी का आविर्भाव हुआ। रागा म्युज़िक के बैनर तले उन्होंने आशा भोंसले, कुमार शानू, उदित नारायण, हेमंत मुखोपाध्याय, तरुण बंद्योपाध्याय, अभिजीत एवं अन्य सिंगर्स को काम करने का भरपूर मौका दिया.
 
एक साक्षात्कार के दौरान जब मैंने उनसे ये पूछा कि ये हिंदी में जो आप रवींद्रसंगीत का अनुवाद किया करते हैं किन-किन सिंगरों से गवाने की ख्वाहिश रखते हैं, के जवाब में उन्होंने कहा था, कुमार शानू, अभिजीत, श्रेया, रशीद खान, अजय चक्रवर्ती, श्रीराधा बनर्जी एवं अन्य कई हैं जिनसे गवाने की इच्छा रखता हूं. लेकिन इसमें काफी खर्चा आ सकता है. जवाब सुनकर मुझे ऐसा लगा कि जिन लोगों को उन्होंने कई बार मौका दिया था अपनी ज़िन्दगी को सवारने के लिए आज वे सेलिब्रिटी जो बन गए हैं, सो पुरानी बातें आजकल कौन याद करता है.
खैर आजकल गुप्ता जी मशहूर भजन सिंगर अनूप जलोटा जी से हिंदी में अनुवाद किये गए अपनी नज़रुल गीति गवाने के लिए लगे हुए हैं.उन्होंने उनके 8 गाने में अपनी आवाज़ देने की मंशा जताई है. आगे अल्लाह जाने.
लेकिन एक बात उन्होंने ये भी बताया कि इस उम्र में लिखने से उनको काफी सुकून मिलता है. वे किसी भी प्रचार के मोहताज नहीं हैं. गुप्ता जी 70 साल के हो गए हैं,जो वाकई कम नहीं है.
 
वैसे उनके सिम्फनी में एक बार फिर से बहार आनेवाली है, जी हां अब पेन ड्राइव्स में रविंद्र संगीत के गाने आनेवाले हैं. हर एक में 250 गाने होंगे . सुचित्रा मित्र, कोनिका बंद्योपाध्याय, फ़िरोज़ा बेगम,आरती मुख़र्जी,हेमंत मुखोपाध्याय, देवब्रत विश्वास एवं अन्य कई सिंगर्स के गाने इसमें शामिल होंगे.
 
खैर जो भी हो, अब तो ऐसा माना जा सकता है कि कवि रवींद्रनाथ टैगोर से प्रेम कुमार गुप्ता का एक अद्भुत प्रेम सम्बन्ध है!

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