No icon

अफवाह कोरोनावायरस: हम और सरकार

#खुशीराम #दुखीराम

खुशीराम- का हाल है भाई।

दुखीराम- हाल तो ठीक ही है भाई मगर आगे ठीक रहेगा इसका पता नहीं।

खुशीराम- काहें का हुआ है?

दुखीराम- हुआ का है आपको नहीं पता है का? ई कोरोना का जो चक्कर आया है इसी से बहुत टेंशन हुई गवा है।

खुशीराम- टेंशन काहें भाई! सरकार तो रोकथाम के लिये लॉकडाऊन करिये दिया है। दो चार दिन का मामला है सब ठीक हो जाएगा।

दुखीराम- ये आपको लगता है!

खुशीराम- काहें आपको क्या गलत लगता है इसमें? 

दुखीराम- हमको तो यही लग रहा है कि हमलोगों से बहुत कुछ छुपाया जा रहा है। मामला बहुते गंभीर है। 

सुखीराम- थोड़ा ठीक से समझाइये, हमें क्या नहीं बताया जा रहा है!?

दुखीराम- आप दो हजार बारह अंग्रेजी फिलिम देखें हैं। 

खुशीराम- हां देखे हैं उसमें क्या ऐसा विशेष है।

दुखीराम- जब परलय आने वाली थी तब यह बात कुछ इक्के-दुक्के लोगों को ही मालूम था। कहां पूरे विश्व की आबादी अरबों में थी मगर उसमें सिर्फ चार जहाज लोगों को ही बचाया गया उसमें भी हर एक जहाज में चार लाख लोगों की कैपासिटी। कुल सोलह लाख लोगों को ही बचाया गया था।

खुशीराम- ऐसा कुछ नहीं है। उस फिल्म से क्या संबंध है इस कोरोना वायरस का।

दुखीराम- आपको समझ में नहीं आ रहा मैं आपको बताता हूं। नोटबंदी याद है आपको?

खुशीराम- हां याद है

दुखीराम- क्या क्या हुआ था?

खुशीराम- मतलब?

दुखीराम- मतलब यह कि नोटबंदी करने के पहले सरकार ने क्या-क्या भूमिका बांधी थी आपको याद नहीं है?

खुशीराम- हां, पहले खाता खुलवा रही थी। लोगों से काले पैसे निकालने को कह रही थी। उसके बाद अचानक से नोटबंदी।

दुखीराम- अचानक से नोटबंदी नहीं बोलिए!. अचानक से नोटबंदी नहीं। पूरी तैयारी के साथ। मगर आमलोगों के लिये यह अचानक ही था। जो लोग आरबीआई से संबंधित थे जिनलोगों का फैसला था उनके लोग नोटबंदी के पहले ही अपना लाभ निकाल ले गये। मरे तो सिर्फ आमलोग। 

खुशीराम- ठीक है मगर उससे अभी इस कोरोना से क्या संबंध

दुखीराम- कोरोना से संबंध नहीं कोरोना के दुष्परिणामों से संबंध है। आपको बताते हैं.. सरकार ने 31 मार्च तक लॉक़डाऊन किया है अगर यह मामला आगे बढ़ा तो? 

खुशीराम- क्यों कैसे आगे बढ़ सकता है.. इसी बीच जहां जहां आइसोलेशन में कोरोना कहीं होगा वह अपने आप मर जाएगा और जब लोग आपस में नहीं मिलेंगे तो संक्रमण वैसे ही नहीं फैलेगा।

दुखीराम- अभी तो मामला सैंकड़ों में है अगर हजारों लाखों में पहुंच गया तो आप हम या हमारी सरकार क्या कर लेगी? हमारे पास वैसे भी इलाज के लिये बचने बचाने का साधन-सुविधा कम है। संक्रमण नहीं फैलेगा वह अलग बात है लेकिन जिनको संक्रमण हो चुका है उनका क्या होगा?

खुशीराम- उनका इलाज होगा और क्या? आप अभी से क्यों घबड़ा रहे हैं। आप ऐसे ही देखिये कि सरकारी तो सरकारी प्राइवेट अस्पतालों में भी सरकार ने ऐसे मरीजों को देखने का आदेश दे दिया है। 

दुखीराम- बाबू आप समझ नहीं रहे हैं। बंदी अगर 31 मार्च तक हो तो अति उत्तम मगर अगर सरकार की मंशा बंदी तीन महीने की करनी हो तो वो आपको सीधे तौर पर थोड़े ही न बताएगी कि भईया तीन महीने तक बंदी रहेगी। लाकडाऊन रहेगा आपलोग कहीं जा आ नहीं सकते। अगर सरकार पहले ही ऐसा अनाउंसमेंट करवा दे तो अफरा तफरी मच जाएगी लोग तीन महीने के रशद के लिये मारकाट लगा देंगे। काला बाजारी करने वाले जमाखोर लोग अचानक से सक्रिय हो जाएंगे। इस स्थिति से बचने के लिये शायद सरकार यह डोज धीरे-घीरे जनता को देना चाहती हो। 

खुशीराम- ऐसा कुछ नहीं है।

दुखीराम- वास्तव में अकाल की स्थिति आ जाएगी। कोई अगर चालाकी से स्टाक में माल खरीद कर रख भी ले तो उसके घर पर हमला नहीं होगा इसकी क्या गारंटी है। उसके घर पर हमला कर लोग लूटपाट नहीं करेंगे इसकी क्या गारंटी है। ऐसे समय में ही असामाजिक तत्व बहुत ज्यादा सक्रिय हो जाया करते हैं। क्या होगा ऐसी स्थिति में। अगर भारत में कोरोना महामारी का रूप धारण कर लेता है तो सरकार के पास हमें मरने देने के सिवा कोई उपाय नहीं होगा। जो जहां मरेगा वहीं पर या तो दफना दिया जाएगा या फिर वहीं पर उसका संस्कार कर लोग कहीं और आवास के लिये अगल बगल पलायन कर रहे होंगे। लाश भी जलाने के लिये आपका कोई अपना या आसपड़ोस खड़ा नहीं रहेगा क्योंकि सबकी स्थिति एक जैसी होगी। कोरोना मरीज को कोई जलाने के लिये ले जाने का रिस्क कभी नहीं उठायेगा। ऐसी स्थिति में जो जहां मरेगा वहीं सड़ता रहेगा। ऐसी स्थिति को ही तो महामारी कहते होंगे। 

......

दुखीराम- आपके अपने लोग कोई दिल्ली तो कोई कलकत्ता तो कोई मुंबई तो पुणे है। तो कोई आपका अपना विदेश में है। अगर आपको किसी से मिलने का दिल करता हो या फिर कोई आफत ही आन पड़ी तो हो सकता है आप उनसे मिलने में सक्षम नहीं हो पाएंगे क्योंकि सारे यातायात साधन बंद कर दिये गये हैं। अभी ही देख लीजिए इस लॉकडाऊन की वजह से जो जहां है वहीं फंसा हुआ है। कैसे आप अपनों को अपने पास आने का या उनके पास जाने का एक्सपेक्ट कर सकते हैं?

खुशीराम- कुछ नहीं आपको जितना कहा गया है उतना ही कीजिए। उपर वाले पर भरोसा रखिये सब ठीक ही होगा। 

दुखीराम- हां सही कहा आपने उपर वाले पर ही भरोसा रखिये। सरकार पर बिल्कुल नहीं। कोरोना जिस प्रकार से फैल रहा है ऐसी स्थिति में आप कितना बचाव कर सकते हैं अपने आपको बताइये। आप सतर्क हो सकते हैं मगर जरूरी नहीं कि आपके आस-पड़ोस में रहनेवाले भी उतना ही सतर्क हों जितना कि आप!

खुशीराम- अरे महाराज आप जितना सोच रहे हैं वैसा नहीं है। आपने देखा नहीं कि बाजार में सरकारी लोग किस प्रकार से आ-आकर एनाउंसमेंट कर रहे थे कि कोई भी दो महीना-तीन महीने का राशन एकसाथ नहीं खरीदेगा। किसी को डरने की जरूरत नहीं। सरकार तो पूरी तरह से साथ दे ही रही है।  परसों ही बाजार में आलू प्याज और अन्य सब्जी ज्यादा कीमत पर दुकानदार  बेचने की कोशिश कर रहे थे और अचानक से पुलिस वहां पहुंच कर दुकानदारों की धुनाई शुरू कर दी कि क्यों ज्यादा कीमत पर बेच रहे हो बाद में कईयों ने माफी मांगते हुए नार्मल कीमत पर सब्जी बेचना शुरू कर दिया।

दुखीराम- ये तो आपको देखकर बहुत ही अच्छा लगा होगा। मुझे भी देख सुनकर अच्छा ही लगा। मगर आप नहीं जानते आप सोचेंगे कि किसी ने सिर्फ दस किलो ही चावल खरीदा मगर वह कई अलग-अलग दुकानों से 10-10 किलो चावल के हिसाब से 2 चार कुंतल चावल खरीदा यह आपने नहीं देखा।

खुशीराम- ऐसे लोग बेकार में डरे हुए हैं।

दुखीराम- बेकार में नहीं सही में डरे हुए हैं। आप सरकार की बात सुनकर कि सारे माल उपलब्ध हैं किसी चीज की कोई कमी नहीं है इस लिये घबराकर ज्यादा सामान खरीद कर जमा न करें।  आप सरकार की यह बात सुनकर अच्छे बन गये और दस बारह दिन या फिर महीने भर का ही सामान लिया। मगर सरकार के यह कह देने भर से लोग थोड़े न मानेंगे वे लोग अपना स्टाक जरूर मजबूत करेंगे और एक समय ऐसा आयेगा कि आप अच्छे बनने के चक्कर में अपने घर में कुछ भी जमा नहीं कर पाये और देखा गया कि बाद में आप भूखों मर रहे हैं।

खुशीराम- लेकिन जब सरकार ने यह कह दिया कि माल की कोई कमी नहीं तो फिर काहें को पेनिक हो रहे हैं?

दुखीराम- पेनिक इसलिये हो रहे हैं कि माल हजारों लाखों हो लेकिन उसे आप तक देनेवाला ही आपके पास नहीं पहुंचे तब आप क्या कर लेंगे? उसे आपतक पहुंचानेवाला भगवान न करे कोरोना पीड़ित हो जाए तो आप क्या कर लेंगे? जहां का माल है वहीं पड़ा रहेगा। और आपको जरूरत है मगर आपके पास वो माल होते हुए भी आपको नहीं मिलेगा क्योंकि माल-पहुंचाने व देने वाला ही बीमार है। 

खुशीराम- आप ज्यादा सोच रहे हैं 

दुखीराम- आप किस  प्रकार से कोरोना से बच सकते हैं बताइये? मान लीजिए आप दूध का पैकेट ही खरीद कर लाते हैं तो अगर वो दूध का पैकेट कोरोना पीड़ित के हाथों से होकर गुजरा है तो आपको उसे किस प्रकार से लेना होगा? आप उस पैकेट को लाकर सीधे घर में नहीं दे सकते। आपको पहले उस दूध के पैकेट को सैनिटाइजर से पोंछना होगा। अपना हाथ पैर अच्छी प्रकार से धोना पड़ेगा उसके बाद ही उस दूध के पैकेट को काटकर आप दूध का इस्तेमाल कर सकते हैं। मगर क्या ऐसा संभव है? कोई दूध का पैकेट सैनिटाइजर से साफ करेगा क्या? अगर आप खुल्ला चावल खरीद रहे हैं तो उसमें भी कोरोना नहीं होगा इसका कोई गारंटी नहीं है। तो उस स्थिति में आपको क्या करना होगा? आप चावल निकालिये। बनाने के लिये अदहन चढ़ाइये। भात बनने के लिये चावल चढ़ाने के बाद आपको पुनः हाथ सैनिटाइजर से धोना पड़ेगा। यदि आप चावल निकालने व धोने की प्रक्रिया में ही अपना मुंह छू लेते हैं तो आपको कोरोना पीड़ित होने से कौन बचाएगा? महामारी है भाई महामारी। सरकार को ये सब पता है लेकिन सरकार आपको बताएगी नहीं क्योंकि जनता पेनिक हो जाएगी। कोरोना से जो होगा सो होगा उससे होने वाले सामाजिक विघटनों से आप अपने आपको कैसे बचा पाएंगे। सच बात तो यही है कि हम कल भी बेवकूफ थे आज भी हैं और कल भी बनाए जाते रहेंगे।

खुशीराम- आप तो हमें डरवा रहे हैं। 31 मार्च के बाद मिलते हैं आपसे! फिर देखेंगे आपकी बातों में कितनी सच्चाई है!

मोदी- अरे! खुशीराम जी! आप फिर यहां!? औरो कुछो चाहिए क्या?

खुशीराम- वो... हां! वो जो तुम सबेरे में बोल रहे थे दो महीने का राशन एक साथ लेने के लिए!

लल्लन- हां आपकी बात सुनकर मैंने अपने साले साहब को भी समझा दिया कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है जैसे रेगुलर सामान ले जाते हैं वैसे ही ले जाइए। वह तो मेरी बात मान लिये मगर सब लोग ऐसे नहीं है ज्यादातर लोग महीने से अधिक का राशन उठाने की फिराक में है और लोग ले भी जा रहे हैं पर हमें इससे क्या! हमें तो पता है जैसा कि आपने बताया कि राशन की कमी होने वाली नहीं है इसलिए मैं भी दे रहा हूं।

खुशीराम- अरे लल्लन भाई तुम्हें तो समझाने में कामयाब हुआ मगर घर वाली को कैसे समझाऊं वह तो मेरी बात सुनने को राजी ही नहीं है वह बोल रही है यदि लल्लन भाई राशन नहीं देना चाह रहे हैं तो हम दूसरी जगह से लाएंगे मगर हमें 3 महीना का राशन एक साथ चाहिए अब घर में रहकर स्त्री से बैर कैसे करूं इसीलिए 3 महीने का राशन दे दीजिए आप। 

लल्लन- अरे खुशी भईया काहें को झूठ बोलत हव। अबही तो भाभी जी आई रहीं। बरी लौटाने के लिए कह रही थीं कि अच्छा बरी नहीं है उससे तो अच्छा है कि आप सोयाबीन ही दे दीजिए। वह भी कह रही थीं कि जितना जरूरत है उतना ही सामान ले जाना चाहिए ताकि दूसरे लोगों को परेशानी ना हो और आप भाभी जी को ही बदनाम कर रहे हैं। हमको तो लग रहा है जरूर आप दुखीरमवा से मिलकर आए हैं।


-Rakesh Kr Srivastava

Comment