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वृक्षारोपण से ही प्रकृति का संरक्षण किया जा सकता है: बिष्ट

कोलकाता, नि.स। वृक्षारोपण के सबसे सामान्य उद्देश्यों में से एक प्रकृति के संरक्षण को बढ़ावा देना है। पृथ्वी पर पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए वृक्षारोपण अत्यंत महत्वपूर्ण है। कुछ समय पहले बंगाल एवं ओड़िसा में आये चक्रवाती तूफान अम्फन की वजह से लाखों की तादाद में पेड़ नष्ट हुए हैं. ऐसे में सरकार भी वृक्षारोपण एवं टूटे पेड़ों को पुनः जीवित करने पर ज़्यादा जोर दे रही है.

इसी बीच केंद्रीय विद्यालय बैरकपुर (आर्मी) के भूतपूर्व छात्रों ने वृक्षारोपण का ज़िम्मा अपने कंधों पर उठा लिया है. क्योंकि अम्फन की वजह से स्कूल प्रांगण में कई पेड़ उखड़ गए थे. उन्होंने गत रविवार को स्कूल प्रांगण में 150 से भी ज़्यादा पेड़ लगवाये.

उपरोक्त कार्यक्रम का उद्घाटन स्कूल के मौजूदा प्रधानाध्यापक श्री चंद्रशेखर बिष्ट ने किया. मुख्य अतिथि के तौर पर स्कूल के पूर्व- प्रधान अध्यापक डॉ. एन सिंह मौजूद थे.

मौके पर बिष्ट ने कहा, 1995 में मैंने केंद्रीय विद्यालय से ही अपनी बारहवीं की पढ़ाई पूरी की थी. आगे चलकर मैं केंद्रीय विद्यालय बैरकपुर (आर्मी) का प्रधान अध्यापक बना. इसलिए केंद्रीय विद्यालय से मेरी काफी यादें जुड़ी हुई हैं. मेरा मानना है कि केंद्रीय विद्यालय से जुड़े रहने का सबसे अच्छा उपाय है इनके एलुमनाई एसोसिएशन के सदस्य बन जाना. ताकि आप पूरे वर्ष असोसिएशन के सभी महत्वपूर्ण कार्य में अपना योगदान कर सकें. आज जिस तरह से भी हो 1996 बैच के छात्रों ने मिलकर स्कूल परिसर में पेड़ों को लगाकर और चार चांद लगा दिए हैं. 

उन्होंने आगे कहा, आज के दौर में इस तरह के प्रयासों की काफी ज़रूरत है. वृक्षारोपण एक ऐसा कार्य है जिससे पर्यावरण का संरक्षण होता है, इसके अलावा लोग एक दूसरे से जुड़ भी पाते हैं. मौजूदा हालात में सोशल डिस्टेंसिंग की वजह से लोगों के बीच की इमोशनल बॉन्डिंग खत्म हो रही है. इसपर ध्यान देना ज़रूरी है.

बिष्ट ने आगे कहा, वृक्ष सदियों से कई पीढ़ियों को फायदा पहुंचा रहे हैं. यूं देखा जाए तो 3 से 4 पीढ़ियों को इससे फायदा होता है. सबसे बड़ी बात तो यह है कि ये विद्यालय परिसर में ही रहते हैं.

वही कार्यक्रम के दौरान उपस्थित एन सिंह ने कहा, मैं पिछले 50 वर्षो से केंद्रीय विद्यालय से जुड़ा रहा. स्कूल से मेरा एक अद्भुत नाता भी है. जब कभी मैं यहां आता हूं और उस बच्चे को देखता हूं जिसे कभी मैंने क्लास 1 में पढ़ाया था और आज वह पिता बन चुका है, तो मेरे मन में एक अद्भुत अनुभूति होती है. दूसरा केंद्रीय विद्यालय की एक और खासियत यह रही है कि इनके नैतिक मूल्य देश मे ही नहीं बल्कि विदेशों में भी सराही जाती है.

उन्होंने आगे कहा, आज हमारे स्कूल के पूर्व छात्र यहां अम्फन की वजह से टूटे हुए पेड़ो को पुनः जिवित कर रहें हैं, जिसे देखकर मुझे काफी अच्छा लग रहा है.

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित पूर्व राष्ट्रीय खिलाड़ी एवं स्कूल के पूर्व छात्र श्री राजकुमार तिवारी ने कहा, हर व्यक्ति को वृक्षारोपण में बढ़चढ़कर हिस्सा लेनी चाहिए एवं उसकी देखभाल भी उसके संतान की ही तरह करनी चाहिए. ऐसा करने से ही जलवायु परिवर्तन को रोकना सम्भव हो पायेगा एवं पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी.

इस अवसर पर अनामिका चक्रवर्ती, प्रिंसिपल, हाई स्कूल- दम-दम, कमल कांत गुप्ता, पीजीटी, केंद्रीय विद्यालय, काँचरापाड़ा, विजय साहा, रीजनल मैनेजर,अदिति,परबिंदर भारती, प्रणब साहा, अरिंदम, पार्थ दे, भरत, सुदीप दत्ता, अनिल यादव, दीपान्निता चटर्जी, अशीम,अध्यक्ष(श्यामनगर परिबेश बंधु) सहित कई लोग मौजूद थे.

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