No icon

CORONA WARRIOR

अस्पताल के उन दिनों में डायरी लिखा करती थी

कोलकाता। पूरे विश्व में चल रही कोरोना महामारी से बचने के लिए जहां सारे वैज्ञानिक टीके की खोज में लगे हुए हैं, वहीं कोरोना इंसानों पर अपना कहर बरपाने में कोई भी कसर छोड़ता नहीं दिख रहा है. यहां तक कि अस्पतालों में बेड मिलना भी अब लोगों के लिए वरदान साबित हो रहा है. तो चलिए आज आपको बैरकपुर के उस शख्स से मिलाते हैं जिन्होंने हाल ही में कोरोना को मात देकर एक मिसाल खड़ा कर दिया है. जी हां, वो बैरकपुर स्थित मनिरामपुर की रहनेवाली रुना अदक(43) हैं. रुना सोदपुर स्थित रथीन्द्र मल्टीप्लेक्स में बतौर मैनेजर की हैसियत से कार्यरत थीं. पर 24 मार्च 2020 को यहां घोषित की गई लॉकडाउन की वजह से सारे मल्टीप्लेक्स बंद हैं. तब से घर पर हैं और अपने परिवार संग समय बिता रही थीं. इसी बीच पिछले महीने यानी अगस्त के अंत में रुना ने हल्का सा बुखार महसूस की. धीरे-धीरे उन्हें सांस की तकलीफ भी होने लगी. जिसके चलते उन्हें बैरकपुर स्थित बी एन बोस अस्पताल ले जाया गया. वहां कोरोना एंटीजन टेस्ट में वो कोरोना पॉजिटिव पाई गईं. इसके अलावा उनका ईसीजी तथा अन्य ब्लड टेस्ट वगैरह भी हुआ. 3 दिनों तक इलाज चलने के बाद उन्हें वहां से बैरकपुर स्थित एक अन्य कोविड अस्पताल टेक्नो ग्लोबल में स्थानांतरित किया गया. जहां नए सिरे से उनका इलाज चालू हुआ. उसके ठीक 8 दिनों के बाद स्वस्थ होकर वो अपने घर लौट आईं.

जब रूना से उनके अस्पताल के दिनों के बारे में पूछा गया, तो उसके जवाब में, उन्होंने कहा, जब मुझे अस्पताल ले जाया गया उसी समय मैं अपने संग एक डायरी लेकर निकली थी. अस्पताल में मैं अपनी आप बीती लिखा करती थी. टेकनो ग्लोबल अस्पताल में मुझे जिस कमरे में रखा गया था वहां रास्ते की ओर एक खिड़की लगी हुई थी जहां से बाहर के लोगों को देखा जा सकता था. मैं लोगों को देखती थी और सोचती थी कि कब मैं घर जा पाऊंगी और अपने लोगों से मिल पाउंगी. दूसरी तरफ कमरे में वहां मेरे साथ ज्यादातर उम्रदराज़ मरीज ही भर्ती थे जो सिर्फ अपने घर की बातें मुझे सुनाया करते थे. और मैं उन्हें सिर्फ यही कहा करती थी कि आप सभी ईश्वर का ध्यान कीजिये. क्यूंकि संसार उन्हीं की वजह से चलती है. और मैं सारी बातें डायरी में लिखती रहती थी. इससे मुझे काफी हौसला मिलता था. क्योंकि कोरोना के मरीज़ों को कमरे से बाहर निकलने नहीं दिया जाता है.

ट्रीटमेंट के बारे में पूछने पर रुना ने कहा, वहां के सारे डॉक्टर तथा नर्स मेरा ही नहीं बल्कि सारे मरीज़ों का खूब ख्याल रखते हैं. समय पर दवा देना, मरीज़ों के घरवालों को फोन पर मरीज़ों के बारे में सूचित करना इत्यादि उन लोगों का हर रोज का काम था. डॉक्टर्स दिन में दो बार आया करते थे. इन सब से इतर एक और बात कहना चाहूंगी कि अस्पताल का खाना वाकई लाजवाब था.

Comment