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बिटुली: साबित करेगी मानवता सबसे बड़ा धर्म

कोलकाता, (नि.स)l भारतवर्ष में कई ऐसे गांव व शहर हैं जहां के लोगों को आज भी दो वक्त की रोटी नसीब नहीं होती है. अगर हम उत्तराखण्ड की बात करें, तो आज भी वहां के कुछ एक गांव में ऐसा मंज़र देखने को मिलता है. इसी उत्तराखंड की पृष्ठभूमि पर निर्देशक प्रताप दत्ता एक हिंदी शॉर्ट फिल्म 'बिटुली' को तैयार करने में लगे हुए हैं. फिलहाल फ़िल्म की शूटिंग जारी है. 16 मिनट की इस फ़िल्म में शिवाजी दे(शिबू), राधा शर्मा, डॉ. मंजू पांडेय उदिता, विजय कुमार और ठाकुर अजमेर सिंह को अभिनय करते देखा जाएगा. इस फ़िल्म के डीओपी एम जीत हैं. वहीं कहानी शिवजी दे(शिबू) ने लिखी है. फ़िल्म का निर्माण नेपाल भारत मैत्री संगठन के बैनर तले किया जा रहा है. इस फ़िल्म के निर्माता अनूप सिंह हैं.

फ़िल्म की कहानी एक गांव में रह रहे ऐसे 40 परिवारों की कहानी बयां करेगी, जो बेहद गरीबी और लाचारी में अपनी ज़िंदगी गुज़ार रहे हैं. इसी बीच एक पर्यटक उस गांव में घूमने के लिए आ पहुंचता है. जब उसे गांव के लोगों की दुर्दशा के बारे में पता चलता है, तो वह उन गांववालों की मदद करने के लिए राजी हो जाता है. और फ़िल्म की कहानी आगे बढ़ती है.

जब निर्देशक प्रताप दत्ता से बिटुली का मतलब पूछा गया, तो इसके जवाब में उन्होंने कहा, उत्तराखंड व पहाड़ी इलाकों में चैत्र महीने में एक रस्म निभाई जाती है, जहां हर एक भाई अपनी बहन की रक्षा करने का वचन देता है. उस वक्त वह अपनी बहन को जो तोहफा भेट करता है, उसे बिटुली कहा जाता है.

उन्होंने आगे कहा, उत्तराखंड में कई ऐसे गांव हैं, जहां लोग मज़बूरी में अपने गांव छोड़कर रोजगार की तलाश में दूसरे शहर जाकर बस रहे हैं. मेरी फिल्म  इसी दुर्दशा को उजागर करेगी. लेकिन हां, इन सब से इतर आज भी समाज में कुछ ऐसे लोग हैं जो अपने मानवीय धर्म को निभा रहे हैं. इसकी झलक भी आपको मेरी फिल्म में दिखाई देगी.

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