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चिदाकाश कलालय की पेशकश 'वसन्त गाथा'

कोलकाता,(नि.स.)l संस्कृत साहित्य में ‘मृच्छकटिकम्’ नामक एक नाट्यकृति उपलब्ध है, जिसे शूद्रक द्वारा रचित बताया जाता है. यह नाटक चारुदत्त नामक एक सुसंपन्न ब्राह्मण की कहानी पर आधारित है, जो अपनी दानशीलता तथा अति उदारता के कारण निर्धनता की स्थिति में पहुंच जाता है. उसके सत्यवादिता, उदारता और मृदु व्यवहार पर एक गणिका, वसंतसेना, उसके प्रति आकर्षित होती है.

आपको बता दें, प्राचीन भारतीय समाज में अभिजात वर्ग से परे की कुछ स्त्रियां गणिका वृत्ति अथवा वेश्या वृत्ति अपना लिया करती थीं. इनमें से गणिकाएं अपेक्षया सम्मानित मानी जाती थीं. वे नृत्य, संगीत आदि में पारंगत होती थीं और ये ही उनकी आजीविका के आधार होते थे, जब कि वेश्याएं शारीरिक संसर्ग के लिए उपलब्ध रहती थीं.

कुछ समय पहले उपरोक्त नाट्यकृति को नाट्य संस्था चिदाकाश कलालय ने वसन्त गाथा के नाम से मंचन किया है. नाटक में वसन्त सेना के पूरे समयकाल को दर्शाया गया. उनके अच्छे और बुरे समय को फ्लैशबैक के ज़रिए बताने की कोशिश की गई. चिदाकाश कलालय नाट्य संस्था का मूल उद्देश्य समाज को यह बताना है कि हर इंसान में एक सकारात्मक रुप होता है.

इस नाटक को पियाल भट्टाचार्या ने निर्देशन किया है. 1 घन्टा और 15 मिनट के इस नाटक में सायक मित्रा, आकाश मल्लिक, पिंकी मण्डल और मंजीरा दे को अभिनय करते देखा गया. 

वहीं अन्य भूमिका में शताब्दी बनर्जी, दीपान मैत्रा, दीप घोष, छंदक जाना, रिंकी मंडल, श्रीतमा चौधरी और शुभेंदु घोष हैं.

बताते चलें,  एक बार फिर से चिदाकाश कलालय वसन्त गाथा के मंचन की तैयारी में हैं.

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