No icon

ज़िन्दगी के संदर्भ में अनिर्बान की उपलब्धियां

कोलकाता(नि.स.) l प्रसिद्ध लेखक अनिर्बान मित्रा की लिखी हुई किताब शून्य थेके नय, योग वियोगेर जय प्रकाशित होने के बाद मानों तहलका मच चुका है. क्योंकि यह किताब आपको खुशहाल रहने के तौर तरीके से अवगत करवाती है. 

हाल ही में यहां आयोजित संवाददाता सम्मेलन के दौरान अनिर्बान मित्रा ने कहा है कि जिस देश में लोग ज़्यादा शिक्षित हैं, वहां के लोगों में विचार क्षमता, सिद्धान्त लेने की क्षमता इत्यादि औरों से ज़्यादा हुआ करती है. ऐसे लोग किसी के बहकावे में नहीं आते हैं. वे निजी सिद्धान्त पर हमेशा अमल करते हैं. जिस वजह से समाज में अपराध, भ्रष्टाचार, कूटनीति, अराजकता, शोषण, ध्वंस इत्यदि कम होते हैैं. इसलिए देश और मनुष्य की उन्नति के लिए शिक्षा बेहद ज़रूरी है.

उन्होंने कहा, जिस देश के ऊपर ऋण का बोझ कम है, देखा गया है कि उस देश के लोगों की कमाई अधिक होती है. कमाई अधिक होने से उनमें कर चोरी की लत लग जाती है. इस वजह से उस देश की सरकार को ज्यादा से ज्यादा कर की राशि एकत्र करने में अपना ध्यान बटाना पड़ता है.

अनिर्बान का कहना है, जिस देश में सरकार हर वर्ग के लोगों को हर  मुमकिन सुविधा मुहैया करवाती है. लोगों में उस देश की नागरिकता पाने की होड़ लग जाती है.

उन्होंने आगे कहा, जिस देश में कानूनी व्यवस्था सटीक है तथा हर एक को न्याय निर्दिष्ट समय पर मिलती हो, ऐसे देश में अपराध के मामले नहीं के बराबर होते हैं.

अनिर्बान मानते हैं, जिस देश की महिलाएं शिक्षित, मेहनती, सतर्क, उत्साही, बाहरी दुनिया से वाकिफ हैं इत्यादि, वे घर सम्भालने के साथ-साथ अपने पेशे को भी सम्भालने में माहिर होती हैं.

उपरोक्त विषय के बारे में गौर करें तो एक बात तय है कि आज समाज जिस दौर से गुजर रहा है, अनिर्बान की ये किताब एक राहत की सांस दिलाती है. समाज में रह रहे सारे लोगों को बदला नहीं जा सकता है. लेकिन कुछ एक की ज़िम्मेदारी ली जा सकती है.

 

Comment