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मानसिक शिक्षा बेहद जरूरी: अनिर्बान मित्रा

कोलकाता, (नि.स)I प्रसिद्ध लेखक अनिर्बान मित्रा का कहना है स्कूल के पाठ्यक्रम के साथ-साथ मानसिक शिक्षा का पाठ्यक्रम होना बेहद ज़रूरी है. यहां तक कि स्कूल के पाठ्यक्रम इस तरीके के होने चाहिए जो बिल्कुल सहज हो, ताकि सभी विद्यार्थी उसे अपना सकें. ऐसा न हो उसे शिक्षा बोझ लगने लगे. क्योंकि अत्यधिक दबाव देने पर विद्यार्थियों का मानसिक संतुलन बिगड़ सकता है. वे उस विषय से भागने पर मजबूर हो सकते हैं. दूसरी तरफ, शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो वास्तविक जिंदगी में काम आए. 

जी हां, शिक्षक दिवस के मौके पर अनिर्बान ने अपनी लिखी हुई किताब शून्य थेके नय योग वियोगेर जय में लिखी हुई उपरोक्त विषय का खुलासा किया.

अनिर्बान ने कहा, मानसिक शिक्षा से मेरा मतलब है ह्यूमैनिटी, रिस्पांसिबिलिटी, वैल्यूज इत्यादि जैसे विषयों से विद्यार्थियों को भली भांति वाकिफ होना चाहिए.

अनिर्बान कहते हैं, किस तरह से  अपने आप को कंट्रोल करें, समाज में कैसे घुल-मिलकर रहें, निर्णय कैसे लें, गलत संगत से कैसे बचें, किस तरह से लोगों में  प्यार बांटे इत्यदि जैसी चीज़ों को बचपन से ही सीखनी चाहिए.

अनिर्बान मानते हैं, मानसिक शिक्षा का विषय लोवर क्लास से लेकर हायर क्लास तक होनी चाहिए. इसके लिए परीक्षाएं भी ली जानी चाहिए ताकि उनकी समझ को परखा जा सके.

देखा जाए तो आज के शिक्षित समाज मे अराजकता, टेंशन, चोरी चकारी, खून  इत्यादि अत्याधिक मात्रा में पनप रही है. इसलिए समाज से मानसिक शिक्षा का विषय अत्यंत ज़रूरी होता जा रहा है. स्वस्थ समाज के लिए यह अत्यंत आवश्यक है.

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